शुक्रवार, 12 जुलाई 2019

मनु कहानी की समीक्षा (लेखक-हृयदेश)



मनु कहानी की समीक्षा

हृदयेश द्वारा रचित मनु कहानी भारतीय जातिगत व्यवस्था पर प्रहार करती नज़र आती है। कहानी अपने सामाजिक परिवेश में समाज को एकजुट होकर रहने का संदेश देती दिखाई देती है और साथ ही समाज में हर एक व्यक्ति तथा उसका काम सभी के लिए आवश्यक है को दिखाती है। कहानी के आधार पर विचार करें तो रचनाकार साफ से बताते हैं कि समाज में स्वर्ण और निम्न जाति कुछ नहीं है सभी का काम अपने-अपने ढंग से महत्त्वपूर्ण है और समाज सभी के सहयोग से चलता है। कहानी में ब्राह्मण और भंगी के बीच की लड़ाई दिखाकर रचनाकार इस बात को सीधे से स्पष्ट भी कर देता है।
कहानी में पंडित सत्यनारायण झिंगरन प्रसिद्ध ज्योतिषरत्न पं. कृपानारायण झिंगरन के पुत्र हैं यही कहानी के नायक कहे या प्रमुख पात्र भी हैं। पं. सत्यनारायण की सात संतान हैं जिसमें छः पुत्री और एक पुत्र भिरगू अर्थात् भृगुनारायण है। भिरगू पिता की यजमानी प्रथा से अलग रहकर कानपुर में एक कपड़ा मिल में नौकरी करता है और अपनी पत्नी तथा छोटी बहन के साथ रहता है। पं. सत्यनारायण की पत्नी भी अपने पति द्वार किए गए  यजमानी के काम से खुश नहीं है क्योंकि समय के साथ यजमानों के तेवर बदल गए हैं वह अब पंडित जी को ज्यादा तवज्जों नहीं देते और यजमानी में पैसा भी नहीं है घर का खर्च भी मुश्किल से चल पाता है। पं. सत्यनारायण का घर भी यजमानी में ही मिला था जब लाला देवकीनंदन को रायबहादुरी का खिताब मिला था तो उन्होंने अपना घुडसाल सत्यनारायण के पिता को दान में दे दिया था। लेकिन समय के साथ सभी कुछ बदल गया है यजमानी चल नहीं रही है कहानी में यही दिखाया गया है। सत्यनारायण जिस भी गली से निकलते हैं तो सोचते चले जाते हैं कि यहाँ मैंने गृह-प्रवेश कराया था, यहाँ मैंने बच्चे का नामकरण किया था आदि पर अब सभी कुछ सामान्य नहीं रहा।
सत्यनारायण कुछ समय कानपुर में अपने बेटे के घर भी जाते हैं लेकिन टिक नहीं पाते वापिस गाँव में आ जाते हैं। एक दिन पं. सत्यनारायण के घर के बाहर कुत्ता मरा होता है वह कुत्ते को उठवाने के लिए मोहना भंगी के घर जाता है जो उसके घर के सामने ही रहता है। मोहना मुन्ना भंगी की बेटी का पति है। जिस समय पंडित कुत्ता उठवाने की बात कहने गए उस समय मोहना के कुछ मित्र किसी काम के लिए बातें कर रहे थे लेकिन पंडित जी का तकाजा रूक नहीं पा रहा था सो इसी बात को लेकर दोनों के बीच जुबानी जंग चल निकली और मोहना ने कुत्ते को नहीं उठाया। इस घटना से पंडित सत्यनारायण को बड़ा आघात लगा और वह मर जाना चाहते हैं।
कहानी अपने व्यापक कलेवर में समाज के सभी अंगों के कार्य और उनके योगदान को दिखाती है साथ ही बताती है कि किसी को भी वर्ग को काम के आधार पर छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए क्योंकि काम तो सभी करते हैं और राष्ट्र के विकास में सभी का योगदान महत्त्वपूर्ण है। कहानी पाठक के दिल और दिमाग दोनों को छू लेती है और समाज में एकता के साथ रहने का संदेश देती है। कहानी की संवाद योजना पात्रानुसार दिखाने का प्रयास किया है। जहाँ तक कहानी की भाषा की बात है वह पाठक की समझ के अनुसार है साथ ही कहानीकार ने संवाद के साथ तीखे शब्दों में गाली-गलोच का भी प्रयोग किया है।

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